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उत्तर प्रदेश में 66 गांवों से निकलेगा ये एक्सप्रेसवे, 1536 करोड़ होंगे खर्च, शुरुआत में 4 लेन और भविष्य में 6 लेन बनेगा

Agra-Aligarh Expressway 2027 तक तैयार होने की उम्मीद। 65 किमी लंबे ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट से दिल्ली-NCR, जेवर एयरपोर्ट, बरेली, कासगंज और बदायूं की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। उद्योग, रोजगार और रियल एस्टेट को भी मिलेगा बड़ा फायदा।
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उत्तर प्रदेश में 66 गांवों से निकलेगा ये एक्सप्रेसवे, 1536 करोड़ होंगे खर्च, शुरुआत में 4 लेन और भविष्य में 6 लेन बनेगा

उत्तर प्रदेश में सड़क संपर्क को मजबूत बनाने के लिए तैयार किया जा रहा आगरा-अलीगढ़ एक्सप्रेसवे राज्य की महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में शामिल हो गया है। करीब 65 किलोमीटर लंबा यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के विकास की नई कहानी लिख सकता है। इसके निर्माण से न केवल आगरा और अलीगढ़ के बीच यात्रा आसान होगी, बल्कि दिल्ली-एनसीआर और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंच भी पहले से कहीं ज्यादा तेज हो जाएगी।

1536 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगा प्रोजेक्ट

यह एक्सप्रेसवे पूरी तरह नए रूट पर विकसित किया जा रहा है। परियोजना की अनुमानित लागत 1536.9 करोड़ रुपये बताई जा रही है। शुरुआत में इसे फोर-लेन बनाया जाएगा, लेकिन भविष्य में बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए इसे छह लेन तक विस्तारित करने का प्रावधान भी रखा गया है।

हाथरस जिले के 48 गांवों की करीब 322 हेक्टेयर भूमि इस परियोजना के दायरे में आएगी। इसके साथ ही आसपास के क्षेत्रों में सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

दो घंटे का सफर होगा सिर्फ एक घंटे में

वर्तमान में आगरा और अलीगढ़ के बीच सड़क मार्ग से यात्रा करने में करीब दो घंटे का समय लग जाता है। एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद यही दूरी लगभग एक घंटे में पूरी की जा सकेगी।

ये मार्ग आगरा में यमुना एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ेगा। इससे दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और एनसीआर क्षेत्र की ओर जाने वाले यात्रियों को तेज और सुगम यात्रा का विकल्प मिलेगा।

66 गांवों को मिलेगा सीधा लाभ

परियोजना के तहत यातायात को सुरक्षित और बाधारहित बनाने के लिए 49 फुटओवर ब्रिज और अंडरपास बनाए जाएंगे। इससे कुल 66 गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और स्थानीय लोगों की आवाजाही आसान होगी।

हाथरस के पास इस एक्सप्रेसवे का जुड़ाव बरेली-मथुरा हाईवे से भी होगा, जिससे बरेली, बदायूं, कासगंज और आसपास के जिलों की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

उद्योग और डिफेंस कॉरिडोर को मिलेगा फायदा

विशेषज्ञों के अनुसार यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति देगा। बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण माल ढुलाई तेज होगी और लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी।

साथ ही यह मार्ग प्रदेश में विकसित किए जा रहे औद्योगिक क्लस्टर और डिफेंस कॉरिडोर के विस्तार में भी अहम भूमिका निभा सकता है। इससे निवेश बढ़ने और नए उद्योग स्थापित होने की संभावना मजबूत होगी।

रियल एस्टेट और रोजगार को मिलेगा बूस्ट

बेहतर कनेक्टिविटी का असर रियल एस्टेट सेक्टर पर भी दिखाई दे सकता है। एक्सप्रेसवे के आसपास के क्षेत्रों में आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं की मांग बढ़ने की उम्मीद है।

इसके अलावा निर्माण कार्य और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

जेवर एयरपोर्ट तक पहुंच होगी और आसान

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) को देश के सबसे बड़े एविएशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। आगरा-अलीगढ़ एक्सप्रेसवे इसके लिए एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी लिंक साबित हो सकता है। एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों से एयरपोर्ट तक पहुंचने का समय कम हो जाएगा।

2027 तक पूरा होने की उम्मीद

परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है और उम्मीद की जा रही है कि वर्ष 2027 तक इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में व्यापार, पर्यटन, उद्योग और परिवहन को नई रफ्तार मिलेगी और यह क्षेत्र विकास के एक नए दौर में प्रवेश करेगा।

disclaimer: लेख में दी गई ये जानकारी सामान्य स्रोतों से इकट्ठा की गई है. इसकी प्रामाणिकता की जिम्मेदारी हमारी नहीं है.

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