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उत्तर प्रदेश में बिछेगी 403 किलोमीटर की नई रेल लाइन, 2 जिलों के बीच आसान होगा सफर

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उत्तर प्रदेश में बिछेगी 403 किलोमीटर की नई रेल लाइन, 2 जिलों के बीच आसान होगा सफर

उत्तर प्रदेश के रेल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने गाजियाबाद से सीतापुर तक 403 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी रेल लाइन के निर्माण को मंजूरी दे दी है।

करीब 14,926 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रेल यातायात को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। नई रेल लाइन बनने से ट्रेनों की गति बढ़ेगी, माल ढुलाई आसान होगी और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

रेल नेटवर्क पर कम होगा दबाव

फिलहाल गाजियाबाद-सीतापुर रेल मार्ग पर क्षमता से करीब 168 प्रतिशत ज्यादा ट्रैफिक चल रहा है। नई लाइन बनने के बाद दिल्ली-गुवाहाटी रेल रूट पर भी दबाव कम होगा और ट्रेनों के संचालन में सुधार आएगा।

यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हापुड़, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर और सीतापुर जैसे शहरों में बाईपास रेल लाइनें विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही 6 नए रेलवे स्टेशन भी बनाए जाएंगे। इससे लंबी दूरी की सुपरफास्ट ट्रेनें बड़े स्टेशनों पर रुकावट के बिना तेजी से आगे बढ़ सकेंगी।

उद्योग और व्यापार को मिलेगा फायदा

नई रेल लाइन से कई क्षेत्रों के कारोबार को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

  • मुरादाबाद: पीतल उद्योग और निर्यात को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी।
  • बरेली और शाहजहांपुर: फर्नीचर, कपड़ा और सीमेंट उद्योगों के लिए माल परिवहन आसान और कम खर्चीला होगा।

धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा

इस परियोजना से पश्चिमी यूपी के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी। गढ़मुक्तेश्वर गंगा घाट, दूधेश्वरनाथ मंदिर, दरगाह शाह विलायत और नैमिषारण्य जैसे धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर रेल सुविधा मिल सकेगी।

रोजगार के नए अवसर और पर्यावरण को फायदा

रेलवे के अनुसार, इस परियोजना के निर्माण के दौरान बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। अनुमान है कि करीब 274 लाख मानव दिवस रोजगार का सृजन होगा, जिससे स्थानीय युवाओं को काम मिलेगा।

इसके अलावा रेल से माल परिवहन बढ़ने पर सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होगी। इससे हर साल करीब 2,877 करोड़ रुपये की लॉजिस्टिक बचत होने का अनुमान है।

पर्यावरण के लिहाज से भी यह परियोजना अहम मानी जा रही है। रेलवे के मुताबिक, इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग 5.15 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर पर्यावरणीय लाभ के समान होगी।

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