Rajasthan Railway: राजस्थान में बिछेगी 148 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन, इन इलाकों की बल्ले-बल्ले
Rajasthan: पश्चिमी राजस्थान में रेल नेटवर्क विस्तार को लेकर रेलवे ने तैयारियां तेज कर दी हैं। सामरिक, पर्यटन और लॉजिस्टिक महत्व को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित फलोदी-नागौर नई रेल लाइन परियोजना अब फाइनल लोकेशन सर्वे (एफएलएस) और डीपीआर तैयार करने के चरण में पहुंच गई है। रेलवे बोर्ड ने दिसंबर 2023 में करीब 148 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के सर्वे को मंजूरी दी थी।
रेलवे सूत्रों के मुताबिक सर्वे एजेंसियां प्रस्तावित रूट, भूमि की स्थिति, संभावित रेलवे स्टेशनों और तकनीकी पहलुओं का अध्ययन कर रही हैं। परियोजना पूरी होने के बाद फलोदी, नागौर और आसपास के ग्रामीण इलाकों को सीधी रेल सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे जोधपुर मंडल में वैकल्पिक रेल मार्ग विकसित होगा और मौजूदा रेल रूट पर यात्री तथा माल परिवहन का दबाव कम हो सकेगा।
नई रेल लाइन को क्षेत्रीय विकास के लिए भी अहम माना जा रहा है। वर्तमान में कई गांवों और कस्बों के लोगों को रेल सेवाओं तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी सड़क मार्ग से तय करनी पड़ती है। रेलवे लाइन बनने से व्यापार, कृषि परिवहन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलने की संभावना जताई जा रही है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार परियोजना अभी प्रारंभिक चरण में है। सर्वे रिपोर्ट और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार होने के बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए रेलवे बोर्ड को भेजा जाएगा।
वहीं फलोदी-जैसलमेर-बाड़मेर-भीलड़ी रेल कॉरिडोर को भी सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत-पाक सीमा से जुड़े पश्चिमी राजस्थान में सैन्य और लॉजिस्टिक नेटवर्क को मजबूत करने के लिए रेलवे नई रेल लाइनों की व्यवहार्यता पर अध्ययन कर रहा है।
भीलड़ी तक प्रस्तावित रेल संपर्क फिलहाल सर्वे और प्रारंभिक अध्ययन के चरण में है। हालांकि निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हुआ है, लेकिन रेलवे इसे भविष्य की रणनीतिक जरूरतों के लिहाज से उपयोगी मान रहा है। इस रेल संपर्क से राजस्थान और गुजरात के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ पर्यटन, पेट्रोलियम उद्योग, खनिज परिवहन और सैन्य गतिविधियों को भी फायदा मिलने की संभावना है।
इसके अलावा उत्तर पश्चिम रेलवे की ओर से राइका बाग-फलोदी-जैसलमेर रेलखंड पर ट्रैक नवीनीकरण, विद्युतीकरण और गति वृद्धि के कार्य भी किए जा रहे हैं। हाल ही में फलोदी-जैसलमेर रेलखंड पर ट्रेनों की अधिकतम गति 100 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़ाकर 110 किलोमीटर प्रति घंटा करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि नई रेल परियोजनाएं लंबी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरती हैं। डीपीआर, तकनीकी स्वीकृति और बजटीय मंजूरी के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
फलोदी-नागौर नई रेल लाइन परियोजना एक नजर में:
कुल प्रस्तावित लंबाई – 148 किलोमीटर
वर्तमान स्थिति – एफएलएस मंजूर, डीपीआर तैयार की जा रही
संभावित लाभ – सीधी रेल कनेक्टिविटी, क्षेत्रीय विकास और ट्रैफिक दबाव में कमी
